नेताजी सुभास चन्द्र बॉस जिन्होंने जापान की सेना के साथ मिलकर अंग्रेजो को उखाड़ फेखने का संकल्प लिया- Netaji Subhas Chandra Bose In Hindi

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नेताजी की वो बुलंद आवाज और वो बुलंद नारे-

“तुम्ह मुझे खून दो ,में तुम्हे आजादी दूंगा “, ” जय हिन्द “

नेताजी सुभास चन्द्र बॉस जिन्होंने जापान की सेना के साथ मिलकर अंग्रेजो  को उखाड़ फेखने का संकल्प लिया-

आज एक ऐसे  वीर पुरुष, स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभास चन्द्र बोस का जन्मदिन है जिन्होंने “आजाद हिन्द” फोज की स्थापना की और “तुम मुझे खून दो ,में तुम्हे आजादी दूंगा “ का नारा बुलंद किया ,आज हम अपने देश के “जय हिन्द” का नारा लगाते है ,यह नारा भी नेताजी दवरा दिया गया था, जो आज हमारे देश का रास्ट्रीय नारा है,

“तुम्ह मुझे खून दो ,में तुम्हे आजादी दूंगा “ जेसे नारों ने सभी भारतीय लोगो  में जोश भरने का कार्य किया ,उस  समय ये नारे बहुत अधिक प्रचलित में थे ,

कुछ नेताजी की बारे में जाने –

नेताजी का जन्म 23 जनवरी को ओड़िसा के एक छोटे से शहर कटक में हुआ था, उनके पिताजी का नाम जानकीनाथ बोस था वे कटक शहर के मशहूर वकील थे , नेताजी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी सेनानी थे,

वे ‘आजाद हिंदी फोज’ के सुप्रीम कमांडर थे, उन्होंने एमिली शेंकल से 1937 में विवाह कर लिया था पर इस राज का खुलासा 1993 में हुआ,  उनके एक लड़की हुई थी जिनका नाम अनीता बोस फाफ है, इस  समय वह अपने पति प्रो मार्टिन के साथ जर्मनी में रहती है|

ऐसे नेताजी सुभास चन्द्र बॉस की आजाद हिन्द फोज ने  अंग्रेजों को दोडा-दोडा कर भगाया-

नेताजी ने जापान और जर्मनी की मदद से आजाद हिंदी फोज की स्थापना की ,’आजाद हिन्द “फोज मूल लक्ष्य था भारत भूमि को अंग्रेजो से मुक्त करना|

इतिहासकारों के अनुसार यही वजह नेताजी की मृत्यु का कारण बनी , जापान की मदद लेना उस मोजुदा ब्रिटिश सरकार को हजम नही हुई और नेताजी उन्हें भविष्य की बड़ी समस्या नजर आने लगे ,इस बात को लेकर ब्रिटिस सरकार ने नेताजी को गुप्तचरों की मदद से ख़त्म का आजाद दे दिया ,

नेताजी ने 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हॉल में भाषण देते हुए “दिल्ली चलो ” का नारा बुलंद किया

1944 को “आजाद हिंद” फोज ने अंग्रजो पर चढाई कर दी और कुछ भारतीयों प्रदेशो को अंगेजो से मुक्त करा लिया,

इसके बाद कोहिमा का युद्ध होता है  पर इसमें सब उल्टा हो जाता है , कोहिमा का युद्ध 4 अप्रैल 1944 से 22 जून के बीच में लड़ा गया लेकिन इस युद्ध में जापानी सेना को पीछे हटना पड़ा  और यह युद्ध का एक महतवपूर्ण पड़ाव सिद्ध हुआ

नेताजी की मृत्यु का रहस्य-

नेताजी की मृत्यु का रहस्य आज भी एक रहस्य बना हुआ है, और यह एक विवाद का विषय भी है ,जापान में  हर साल 18 अगस्त को उनका जन्म दिन धूम धाम से मनाया जाता है, उनके परिवार का मानना है की नेताजी की मृत्यु 1945 में नही हुई है ,भारतीय सरकार ने नेताजी की मृत्यु से सबंधित पेपर आज तक जनता को नही बताये और सार्वजनिक नही किये

सुभास चन्द्र बोस quotes-

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